मेरी गंगा यात्रा भाग 114
इक प्रयास गंगा बचे
#गंगाआंदोलन हमारी शोध और गंगा यात्रा का किसी सरकार या व्यक्ति विशेष से विरोध नही है हमारा काम सरकार को सत्य बताना और सही मार्ग दर्शन करना है कांग्रेस हो या भाजपा की केंद्र सरकार हम निष्पक्ष अपनी राय देते आ रहे और भविष्य मे जब तक गङ्गा प्रदूषण मुक्त या हम देहमुक्त न हो जाये प्रयास जारी रहेगा ,जिसने गंगा के प्रति सहानुभूति रखी या प्रयास किये या कोशिश भी की उन्हें सरहाया भी गया वर्तमान मे राजीव गांधी,मनमोहन सिंह,नरेंद्रमोदी जी ,उमा भारती,नितिन गडकरी आदि के प्रयास को उत्तम कहा गया परन्तु कुछ संगठन और व्यक्ति भी हैं जो केवल मोदी जी प्रति घृणा ही रखते है मैं ऐसे जो लोगो का विरोध करता हु क्योंकि किसी भी विषय को लेकर निजी दुश्मनी न निकाले,आज ऐसे ही एक लेख को देखा हमारी शोध को लेकर उसे मोदी विरोधी रूप मे प्रयोग किया हँसी आती हैं उन पर,हमने पिछले भाग मे कहा गंगा जल से कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज किया जा सकता है वही किसी संगठन ने इसका का खण्डन कर दिया उनकी शोध का आधार क्या है हरि ही जाने,पर हम मानते है पिछले दशकों से गंगा जल जिसमें, एक शोध के मुताबिक, मान्य स्तर से अधिक बैक्टीरिया और दूसरे पैथोजेन होते हैं वही गंगा जल जिसके बारे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कह चुका है कि वह पीने के लायक भी नहीं है वही गंगा जल जो बुरी तरह प्रदूषित है इडियन इंस्टीच्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी ने कहा है कि गंगा में इस तरह के बैक्टीरिया की बहुत बड़ी तादाद है, जो असामान्य है। इसने यह भी कहा है कि गंगोत्री से 100 किलोमीटर बाद ही गंगा में इस तरह के बैक्टीरिया पाए जाने लगे
एंटी बायोटिक बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है। तक ऐसे बैक्टीरिया से पूरी दुनिया में सालाना लगभग 7 लाख लोगों की मौत का कारण बन चुके हैं
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार, वाराणसी शहर के अस्सी, भदायिणी, हरिश्चंद्र, राजेंद्र प्रसाद और राजघाट घाटों से लिए गए नमूनों में बड़ी मात्रा में जो बैक्टीरिया पाए गए, उनके जीन में बीटा लैक्टम, एंडेलफेमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक रोधी गुण पाए गए। यह बेहद ख़तरनाक स्थिति है।
तो यह निश्चित है कि प्रदूषण ने चलते मनुष्य ने गंगा को मैला किया हैं गंगाजल शुद्ध हो तो अमृत हैं
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