मेरी गंगा यात्रा भाग 108
इक प्रयास गंगा बचे
मित्रों आज गंगा जी के तट पर बसै भागलपुर की चर्चा करते है और हो भी क्यो नही,बनारस के बाद दूसरा शहर भागलपुर हैं जो गङ्गा के लिये नासूर हो रहा था भागलपुर मैं तेजी से औद्योगिकी करण का विकास हुआ और देखते देखते भागलपुर में फैक्ट्रीयो की बाढ़ आ गई जो गंगा का जल मैला करने मे अहम भूमिका निभाने लगी, कोरोना काल मे गंगाजल में 40 से 50 फीसद का सुधार दिख रहा था नदी को प्रदूषित करने वाले कल-कारखानों के बंद होने के कारण गंगा नदी में मिलने वाले दूषित जल का आना बंद न के बराबर था। लोगों का स्नान बंद था शव भी न के बराबर जलाये जा रहे थे जहाज का चलना बंद था, जिससे गंगा का पानी स्वच्छ दिख रहा था। यह भी कह सकते हैं कि पानी में डुबकी लगाने के बाद जमीन दिखने लगी थी।घाटों के किनारे होने वाली सभी गतिविधियां बंद थी जैसे शव दाह, नौकायान या अन्य काम। इस कारण भी पांच से दस प्रतिशत गंदगी कम हुई थी परंतु वहीं, शहर कस्बो के सीवरेज पर लगाम नहीं लग पाई थी। इस दौरान गंगा के काफी साफ होने के संकेत मिलने लगे थे इसमें घुलित ऑक्सीजन 6 से 7 प्रति लीटर मिलीग्राम से बढ़कर 9-10 तक पहुंच गई लॉकडाउन के दौरान हर पारामीटर में 40 से 50 फीसद असर हुआ। इस कारण गंगा निर्मल प्रदूषण मुक्त दिख रही थी।भागलपुर का 90 प्रतिशत उद्योगों का प्रदूषण जल गंगा में डिस्चार्ज होता है। यहां भारी पैमाने पर कपड़े की रंगाई होती है। जिससे भूमि का जल स्तर कम तो होता ही हैं भूमि जल स्तर प्रदूषित भी होता हैं यह केमिकल गंगा नदी में जाता था।जो गङ्गा जल को प्रदूषित तो करता ही हैं जलीयजीव को भी नष्ट करता है रंगाई मे प्रयोग होने वाले कैमिकल कैंसर के कारक भी हो सकते है ऐसा ही दिल्ली और उसके आसपास भी हुआ तेजी से रँगाई, जीन्स रँगाई करने वालो की बाढ़ आ गई जो दिल्ली से निकाले गये वह सब गाजियाबाद, लोनी, भोपरा, नोयडा आ गये, जिससे भूमिका जल स्तर कम हो गया और दूषित जल ने हिंडन को प्रदूषित कर दिया, साथ ही भूमि जल स्तर को भी प्रदूषित कर दिया क्षेत्र मे कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी,वही कल-कारखानों के बंद होंने से भागलपुर मे काफी कम नजर आई,प्रतिदिन सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में डेढ़ से दो सौ शव दाह किये जाते थे यह संख्या 10 से 20 हो गई थी। राख कम प्रवाहित हो रही थी। भारी संख्या में लोग गंगा स्नान करते थे और पुष्प आदि बहाते थे।परन्तु यह सब बंद हो गया, इस कारण भी गंगा साफ हुई भागलपुर में गंगा में होने वाले प्रदूषण में उद्योगों की हिस्सेदारी पांच से 10 प्रतिशत होती है। जो सरकारी आंकड़ों के अनुसार है लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधे बंद थे इसलिए स्थिति सुधार हुआ अभी भी सीवेज बंद नहीं हुए । इसमें करीब 43 नालों से नगर निगम के 25 और आम जनता का 45 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) गन्दा पानी,कचरा गंगा में बहाया जा रहा है। इससे कुछ अंश साफ देखने को मिला था जो अब पुनः अपनी पुरानी स्थिति मे हैं। गंगा अनवरत बहाव से अपने आप साफ हो जाती है। अगर सीवर के पानी पर रोक होता, तो गंगाजल पूरी तरह निर्मल हो जाता। किन्तु कोरोना के चलते यह नदी तक नहीं पहुंच पा रहा है।लॉकडाउन के कारण फैक्ट्रियां भी बंद हैं, इसकी वजह से गंगा का पानी बहुत साफ नजर आ रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों में खासा सुधार देखा जा रहा है, जहां बड़े पैमाने पर कचरा नदी में डाला जाता था। गंगा में भागलपुर के आसपास पानी बेहद साफ हो गया है। हालांकि, घरेलू सीवरेज की गंदगी अभी भी नदी में ही जा रही है। औद्योगिक कचरा गिरना एकदम बंद ही हो गया है। इसीलिए पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार रियल टाइम वॉटर मॉनिटरिंग में गंगा नदी का पानी 36 मानिटरिंग सेंटरों में से 27 में नहाने के लिए उपयुक्त पाया गया है। जो अच्छी ख़बर हैं मॉनिटरिंग स्टेशनों के ऑनलाइन पैमानों पर पानी में ऑक्सीजन घुलने की मात्रा प्रति लीटर छह एमजी से अधिक, बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड दो एमजी प्रति लीटर और कुल कोलीफॉर्म का स्तर 5000 प्रति 100 एमएल हो गया है। इसके अलावा पीएच का स्तर 6.5 और 8.5 के बीच है, जो गंगा नदी में जल की गुणवत्ता की अच्छी सेहत को दर्शाता है। अब क्या प्राथर्ना करें औद्योगिक क्षेत्र पर अंकुश हो
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