Tuesday, October 13, 2020

मेरी गंगा यात्रा भाग 112

मेरी गंगा यात्रा भाग 112
इक प्रयास गंगा बचे
भाग न 111 मे आपने पढ़ा कि 2013, से प्रदूषण के आंकड़े क्या हैं  और स्थिति मे सुधार की जगह स्थिति बिगड़ी ही है जो कि तब है जब कि मोदी जी की नमामि गङ्गा परियोजना चल रही हैं आपको बताया कि अब तक कितना खर्च हुआ चलो अब आगे की रिपोर्ट देखते हैं और बीच बीच अपनी राय भी देते है बात करते है बी डीओ की, बीओडी ऑक्सीजन की वह मात्रा है जो पानी में रहने वाले जीवों को तमाम गैर-जरूरी ऑर्गेनिक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चाहिए. बीओडी जितनी ज्यादा होगी पानी का ऑक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगा और बाकी जीवों पर उतना ही बुरा असर पड़ेगा.डीओ (डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन) का मतलब है कि पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा.आप जानते ही हैं आपने स्कुल टाइम मे जीवविज्ञान पढ़ा होगा कि जल मे रहने वाले जीव जल से ही पर्याप्त मात्रा मे आक्सीजन लेते है परन्तु ऐसी अवस्था मे क्या होगा जब जल ही दूषित होगा ऎसा मे जल से आक्सीजन की मात्रा का कम होना जीवो मरने के लिये मजबूर कर देगा  पानी में मिलने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए छोटे जीव-जंतुओं को ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है. अगर डीओ की मात्रा ज़्यादा है तो इसका मतलब है कि पानी में प्रदूषण कम है. बीडीओ हैं तो हानि कारक है क्योंकि जब प्रदूषण बढ़ता है तो इसे ख़त्म करने के लिए पानी वाले ऑर्गनिज़्म को ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है, इससे डीओ की मात्रा घट जाती है.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) साल 1980 से भारत की सम्पूर्ण नदियों के जल की गुणवत्ता की जांच करता आ रहा है गौरतलब हैं इस समय ये संगठन 2,525 किलोमीटर लंबी गंगा नदी की 80 जगहों पर जांच करता है. इससे पहले सीपीसीबी 62 जगहों पर गंगा के पानी की जांच करता था.परन्तु जो पर्याप्त नही था फिर इसे बढ़ा कर 80 कर दिया गया अब सीपीसीबी भी क्या कर सकता हैं जब समाज जागरूक होना ही नही चाहता,सभी दायत्व सरकार का जो हैं,.?साल 2017 की सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 80 में से 36 जगहों पर गंगा नदी का बीओडी लेवल 3 मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा था और 30 जगहों पर बीओडी लेवल 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था. वहीं साल 2013 में 31 जगहों पर गंगा का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा था और 24 जगहों पर 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था.
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, गंगोत्री, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग और ऋषिकेश के ऊपर ही  गंगा का पानी शुद्ध है. यहां पर बीओडी लेवल 1 मिलीग्राम/लीटर है और डीओ लेवल 9 से 10 मिलीग्राम/लीटर के बीच में है जो अच्छी ख़बर हो सकती हैं. हालांकि जैसे-जैसे गंगा आगे का रास्ता तय करती हैं,गंगाजी नरकीय सफर आरम्भ हो जाता हैं मित्रो जैसे जैसे पानी में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जाती है.उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरिद्वार में गंगा की हालत बहुत ज़्यादा ख़राब हो जाती हैं.आगे कुम्भ आने वाला ऐसे में स्थिति चिंता जनक हो सकती हैं यहां हरिद्वार के पानी का अधिकतम बीओडी लेवल 6.6 मिलीग्राम/लीटर है, जो कि नहाने के लिए भी सही नहीं है. इसी तरह के हालात बनारस, इलाहाबाद, कन्नौज, कानपुर, पटना, राजमहल, दक्षिणेश्वर, हावड़ा, पटना के दरभंगा घाट इत्यादी जगहों के हैं.कई सारे जगहों पर साल 2013 के मुकाबले गंगा और ज़्यादा दूषित हुई है.तो सोचने पर हम मजबूर है क्या गंगा प्रदूषण को लेकर हम सही बढ़ रहे है,..? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जहां 2013 में गंगा नदी का अधिकतम बीओडी लेवल 5.1 पर था, वहीं साल 2017 में ये बढ़कर 6.1 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया है.तो सोचो प्रधानमंत्री की नाक के नीचे यह स्थिति है तो बाकी क्या बचा,बाकी नमामि गंगे पर विपक्ष उंगली उठायें तो गलत होगा..?
इसी तरह साल 2013 में इलाहाबाद का बीओडी लेवल 4.4 था और अब ये बढ़कर 5.7 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया है.
साल 2013 में हरिद्वार का बीओडी लेवल 7.8 था और 2017 में यह 6.6 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और बुलंदशहर के अलावा पश्चिम बंगाल में त्रिबेनी, डायमंड हार्बर और अन्य जगहों पर भी बीओडी लेवल बढ़ गया है.यह तो पुरानी बात भी कह सकते है 2013,2017 पर 2020 की रिपोर्ट का क्या हालत होगा..?
(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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