मेरी गंगा यात्रा भाग 107
इक प्रयास गंगा बचे
भारत में सबसे बड़ी नदी है गंगा जी हैं नदी जल रूपणी गंगा भारत के ग्यारह प्रदेशों को भारत की आबादी के 40 प्रतिशत लोगों को पानी उपलब्ध कराती है।वही भारत 90%लोग किसी न किसी रूप से गंगा जल से जुडे हैं यह उनकी आस्था का प्रश्न जो है और हम उसे उपहार मे प्रदूषण दे रहे है, दूसरे शब्दों में कहें तो गंगा भारत की जीवनरेखा है गंगाजी गंगोत्री से 22 किलोमीटर ऊपर गोमुख नामक स्थान से अवतरित होती हैं पावन गंगा आज दिन-प्रतिदिन मैली होती जा रही है। आज यह दुनिया की छठी सबसे प्रदूषित नदी मानी जाती है। देश के प्रमुख धार्मिक शहर वाराणसी की पहचान गंगा जी से ही हैं आज उस के निर्मल जल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गंगा का जलस्तर इस तेजी से गिर रहा है कि विगत एक वर्ष के भीतर गंगा में ढाई फिट पानी घट गया है। अगर हैं भी तो कानपूर से निकला विषैला पानी और कचरे का अंबार , जिन घाटों पर बैठकर कभी लोग गंगा के निर्मल जल में स्नान कर पापों का नाश किया करते थे उन घाटों से गंगा का जल दूर हो गया है। गंगा के घटते जलस्तर और प्रदूषित जल से सभी परेशान हैं। गंगा नदी में अब आक्सीजन की मात्रा भी सामान्य से कम हो गई है। वैज्ञानिक मानते हैं कि गंगा के जल में बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु ( जिसे हम गंगत्व कहते है) होते हैं, जो जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्म जीवों को समाप्त कर देते हैं। इस पर पिछले लेख मे चर्चा हो चुकी हैं किन्तु प्रदूषण के चलते इन लाभदायक विषाणुओं की संख्या में भी काफी कमी आई है। इसके अतिरिक्त गंगा को निर्मल व स्वच्छ बनाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे कछुए, मछलियाँ एवं अन्य जल-जीव समाप्ति की कगार पर हैैं। यदि ऐसी तरह गंगा के जल जीव मिटते रहे तो गंगा जी का ही नही भारतीय संस्कृति ही अंत होगा
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