मेरी गङ्गा यात्रा भाग-16
"गंगा में गंदा पानी नहीं जाने देंगे" मोदी
कितना अच्छा जुममला है सुनते सुनते कान भी पक गये मानो, मोदी जी से न नराजगी है न रोष हाँ है तो शिकायत और कुछ करने की आशा, कुछ सार्थक, जो नजर आये परिणाम दिखै कुछ कड़े कदम उठाये जाये , जुर्माना लगाना हल नही है हल समाज जाग्रति ओर प्रदुषण मुक्त नदियां और भारत है पश्चिमी सभ्यता की और ताकने वाले समाज को चाहिये कि केवल पश्चिम का फैशन खाना ही न अपनाये उनसे रहन सहन देश प्रेम सही जाग्रति भी सीखे वे शहर अपनी नदियों को साफ रखना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं क्योंकि वह देश और देश की संम्पत्ति को अपना मानते है और हम.? सारी जिम्मेदारी सरकार की .? क्योंकि हम चुन कर लाये हैं किन्हें चुना है वो कहा से आये है है कहि बाहर से आये हैं.? है तो वो भी हम ही मे से एक हम जैसे निक्कमे, और हो भी क्यो न करोड़ों रुपये खर्च कर सत्ता मे आये हैं राजनीति बिजनेस है कोई मज़ाक थोड़े है बिजनेस में सेवा कैसी..?
चोर चोर मोसेरे भाई, सभी अपनी अपनी बॉल को दूसरे के पाले मे फैक देते , हम अपनी जिम्मेदारी को समझना नही चाहते जनता सरकार को दोष देती है सरकारे जनता को पर सुधरना कोई नही चाहता भारत सरकार हर बार कहती है कि गंगा नदी में प्रदूषित जल के प्रवाह पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी और सिर्फ जलशोधन संयंत्र से साफ किए गए पानी को ही नदी में छोड़ा जाएगा.
इस हकीकत से किसी को सरोकार नहीं कि अब भारत में नदियों के नाम पर नाले बहते हैं. जीवनदायिनी गंगा भी इस त्रासदी की शिकार है. गंगा को मां कहकर सत्ता में आई केन्द्र सरकार ने अब गंगा और अन्य नदियों की सफाई का बीड़ा उठाया है.भारतीय संस्कारों में गंगा महज एक नदी नहीं है बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन का माध्यम है. ऐसा माध्यम जिसे मृत्युलोक पर मोक्षदायिनी बनाने के लिए कठोर तप कर भागीरथ स्वर्ग से धरती पर उतार लाए थे. सदियों तक करोड़ों लोगों को मोक्ष का अहसास दिलाने वाली गंगा आज खुद अपनी ही संतानों से अपने वजूद को बचाने की प्राथर्ना कर रही है. यह विडंबना सिर्फ गंगा की नहीं बल्कि उसकी अपनी सहोदरा यमुना और देश के तमाम भागों में अपना आंचल खोलकर करोड़ों जीवन संवार रही अन्य नदियों की भी है. हिमालय से धवल रुप में उतरकर मैदान तक आते आते गंगा और यमुना सड़ांध मारते उस गंदे नाले के रूप मे परिवर्तित हो जाती हैं जिसके किनारे सिर्फ दो पल ठहरना भी दूभर हो गया है, उसके चुल्लू भर पानी में आचमन की तो बात ही छोड़िए.साहब ,
"गंगा में गंदा पानी नहीं जाने देंगे" मोदी
कितना अच्छा जुममला है सुनते सुनते कान भी पक गये मानो, मोदी जी से न नराजगी है न रोष हाँ है तो शिकायत और कुछ करने की आशा, कुछ सार्थक, जो नजर आये परिणाम दिखै कुछ कड़े कदम उठाये जाये , जुर्माना लगाना हल नही है हल समाज जाग्रति ओर प्रदुषण मुक्त नदियां और भारत है पश्चिमी सभ्यता की और ताकने वाले समाज को चाहिये कि केवल पश्चिम का फैशन खाना ही न अपनाये उनसे रहन सहन देश प्रेम सही जाग्रति भी सीखे वे शहर अपनी नदियों को साफ रखना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं क्योंकि वह देश और देश की संम्पत्ति को अपना मानते है और हम.? सारी जिम्मेदारी सरकार की .? क्योंकि हम चुन कर लाये हैं किन्हें चुना है वो कहा से आये है है कहि बाहर से आये हैं.? है तो वो भी हम ही मे से एक हम जैसे निक्कमे, और हो भी क्यो न करोड़ों रुपये खर्च कर सत्ता मे आये हैं राजनीति बिजनेस है कोई मज़ाक थोड़े है बिजनेस में सेवा कैसी..?
चोर चोर मोसेरे भाई, सभी अपनी अपनी बॉल को दूसरे के पाले मे फैक देते , हम अपनी जिम्मेदारी को समझना नही चाहते जनता सरकार को दोष देती है सरकारे जनता को पर सुधरना कोई नही चाहता भारत सरकार हर बार कहती है कि गंगा नदी में प्रदूषित जल के प्रवाह पर पूरी तरह से रोक लगाई जाएगी और सिर्फ जलशोधन संयंत्र से साफ किए गए पानी को ही नदी में छोड़ा जाएगा.
इस हकीकत से किसी को सरोकार नहीं कि अब भारत में नदियों के नाम पर नाले बहते हैं. जीवनदायिनी गंगा भी इस त्रासदी की शिकार है. गंगा को मां कहकर सत्ता में आई केन्द्र सरकार ने अब गंगा और अन्य नदियों की सफाई का बीड़ा उठाया है.भारतीय संस्कारों में गंगा महज एक नदी नहीं है बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन का माध्यम है. ऐसा माध्यम जिसे मृत्युलोक पर मोक्षदायिनी बनाने के लिए कठोर तप कर भागीरथ स्वर्ग से धरती पर उतार लाए थे. सदियों तक करोड़ों लोगों को मोक्ष का अहसास दिलाने वाली गंगा आज खुद अपनी ही संतानों से अपने वजूद को बचाने की प्राथर्ना कर रही है. यह विडंबना सिर्फ गंगा की नहीं बल्कि उसकी अपनी सहोदरा यमुना और देश के तमाम भागों में अपना आंचल खोलकर करोड़ों जीवन संवार रही अन्य नदियों की भी है. हिमालय से धवल रुप में उतरकर मैदान तक आते आते गंगा और यमुना सड़ांध मारते उस गंदे नाले के रूप मे परिवर्तित हो जाती हैं जिसके किनारे सिर्फ दो पल ठहरना भी दूभर हो गया है, उसके चुल्लू भर पानी में आचमन की तो बात ही छोड़िए.साहब ,
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