मेरी गङ्गा यात्रा भाग-15
नदियों के किनारों पर पर्याय कब्जा करने की साजिश होती रही है सँस्कृति के आरम्भ से ही नदियों के किनारों पर शहरों का निर्माण किया जाता था क्योंकि मानव को पता था जल ही जीवन है नदियों ने कई सँस्कृति को जन्म दिया आज भी इतिहास मे उन्हें सन्मान से जाना जाता है तब से आज तक नदियों ने मानव को अपने जल से पोषित किया है पर मानव है अहसान फरामोश उसने अपनी जीवनदायिनी नदियों को ही धोखा दिया है नदियों का अंत करने पर उतारू है आज भारत मे गङ्गा आदि नदियों के मल, कचरा, नालो का जल ढोने वाले जल मार्ग मात्र रह गये है शहरों का सारा कूड़ा नदियों मे बहाया जाता हैं नदियां स्लम क्षेत्र बन गई, इतना ही नही आज नदियों की हत्या के बाद भी हम बेशर्म लोग उन नदियों पर ही निभर है दिल्ली, की यमुना हो या गङ्गा के किनारे बसे कानपुर, इलाहाबाद, आदि नालो के पानी को ही साफ कर पीते है है न कमाल, नदियों का जल है मल वो पेट मे, पेट का मल जल वो नदियों मे, सब से अधिक परेशानी प्लास्टिक के प्रयोग से है जो जल के मार्ग को अवरुद्ध करता हैं मुझे याद है कुछ वर्ष पूर्व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात की थी । इसके लिए एनजीटी ने जिला प्रशासन व नगर निगम को निर्देश दिए थे कि पॉलीथिन को बेचने वालों पर पांच हजार का जुर्माना लगाएं। एनजीटी ने यह आदेश लोकल कमिश्नर शारिक जैदी की रिपोर्ट के आधार पर दिया था कूड़ा प्रबंधन, गंगा किनारे खुले होटल, गंगा घाटों पर फैले अतिक्रमण के मामले में एनजीटी ने सुनवाई की तिथि 22 जुलाई 14 तय की थी
हरिद्वार में जगह-जगह बिखरी पॉलीथिन, कूड़ा निस्तारण व्यवस्था, गंगा किनारे अतिक्रमण गंगा घाटों की सफाई व्यवस्था की वस्तुस्थिति देखने के लिए एनजीटी लोकल कमीश्नर शारिक जैदी को 19 जून को हरिद्वार भेजा था। हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंदगी, अतिक्रमण को देखकर लोकल कमिश्नर ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी। गुरुवार को इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना था प्रेस को
कमिश्नर शारिक जैदी ने बताया था कि एनजीटी ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का पालन करने के लिए एनजीटी ने जिला प्रशासन व नगर निगम को निर्देश दिए हैं। पर हुआ क्या सब दो दिन का शोर बनकर रह गया दो दिन बाद ही वही हाल था जो पहले था मैं भी कहा कम था मैंने भी हरिद्वार की फ़ोटो खीचकर लगा दी प्रशासन हर जगह एक सा ही है, क्यो न हो है तो वो भी इंसान,न पालीथिन का प्रयोग बंद हुआ न प्रदूषण,शहर के व्यापारी भी नही चाहते कि प्रदूषण पर सख्त कदम उठाये क्योकि इससे उनका नुकसान होता, प्रात गङ्गा जल का आचमन करने वाले तिलकदारी व्यपारी भी मानते हैं धर्म अपनी जगह है और व्यपार अपनी जगह है हरिद्वार के किनारे बने बाजारों, आश्रमों का सीधा मल गङ्गा मे जाता है कूड़ा गङ्गा किनारों पर, या पानी के साथ गङ्गा मे,
नदियों के किनारों पर पर्याय कब्जा करने की साजिश होती रही है सँस्कृति के आरम्भ से ही नदियों के किनारों पर शहरों का निर्माण किया जाता था क्योंकि मानव को पता था जल ही जीवन है नदियों ने कई सँस्कृति को जन्म दिया आज भी इतिहास मे उन्हें सन्मान से जाना जाता है तब से आज तक नदियों ने मानव को अपने जल से पोषित किया है पर मानव है अहसान फरामोश उसने अपनी जीवनदायिनी नदियों को ही धोखा दिया है नदियों का अंत करने पर उतारू है आज भारत मे गङ्गा आदि नदियों के मल, कचरा, नालो का जल ढोने वाले जल मार्ग मात्र रह गये है शहरों का सारा कूड़ा नदियों मे बहाया जाता हैं नदियां स्लम क्षेत्र बन गई, इतना ही नही आज नदियों की हत्या के बाद भी हम बेशर्म लोग उन नदियों पर ही निभर है दिल्ली, की यमुना हो या गङ्गा के किनारे बसे कानपुर, इलाहाबाद, आदि नालो के पानी को ही साफ कर पीते है है न कमाल, नदियों का जल है मल वो पेट मे, पेट का मल जल वो नदियों मे, सब से अधिक परेशानी प्लास्टिक के प्रयोग से है जो जल के मार्ग को अवरुद्ध करता हैं मुझे याद है कुछ वर्ष पूर्व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात की थी । इसके लिए एनजीटी ने जिला प्रशासन व नगर निगम को निर्देश दिए थे कि पॉलीथिन को बेचने वालों पर पांच हजार का जुर्माना लगाएं। एनजीटी ने यह आदेश लोकल कमिश्नर शारिक जैदी की रिपोर्ट के आधार पर दिया था कूड़ा प्रबंधन, गंगा किनारे खुले होटल, गंगा घाटों पर फैले अतिक्रमण के मामले में एनजीटी ने सुनवाई की तिथि 22 जुलाई 14 तय की थी
हरिद्वार में जगह-जगह बिखरी पॉलीथिन, कूड़ा निस्तारण व्यवस्था, गंगा किनारे अतिक्रमण गंगा घाटों की सफाई व्यवस्था की वस्तुस्थिति देखने के लिए एनजीटी लोकल कमीश्नर शारिक जैदी को 19 जून को हरिद्वार भेजा था। हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंदगी, अतिक्रमण को देखकर लोकल कमिश्नर ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी थी। गुरुवार को इस पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना था प्रेस को
कमिश्नर शारिक जैदी ने बताया था कि एनजीटी ने हरिद्वार जिले में पॉलीथिन की बिक्री व उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का पालन करने के लिए एनजीटी ने जिला प्रशासन व नगर निगम को निर्देश दिए हैं। पर हुआ क्या सब दो दिन का शोर बनकर रह गया दो दिन बाद ही वही हाल था जो पहले था मैं भी कहा कम था मैंने भी हरिद्वार की फ़ोटो खीचकर लगा दी प्रशासन हर जगह एक सा ही है, क्यो न हो है तो वो भी इंसान,न पालीथिन का प्रयोग बंद हुआ न प्रदूषण,शहर के व्यापारी भी नही चाहते कि प्रदूषण पर सख्त कदम उठाये क्योकि इससे उनका नुकसान होता, प्रात गङ्गा जल का आचमन करने वाले तिलकदारी व्यपारी भी मानते हैं धर्म अपनी जगह है और व्यपार अपनी जगह है हरिद्वार के किनारे बने बाजारों, आश्रमों का सीधा मल गङ्गा मे जाता है कूड़ा गङ्गा किनारों पर, या पानी के साथ गङ्गा मे,

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