Saturday, June 17, 2017

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-10

मेरी गङ्गा यात्रा भाग-10

हिमालय के शिखर गोमुख से निकलकर बंगाल की खाड़ी में मिलने वाली माँ गंगा भारतवासियों के लिए धार्मिक एकता, श्रद्धा, सनातन महत्व, आध्यात्मिक,मुक्ति दायनी और पतितपावनी के रूप में परम् पूज्य है. इसमें दो राय नहीं कि इसके तट पर हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का विकास हुआ है गङ्गा जी के तट पर इतिहास की नामी हस्तियों ने जन्म लिया,
पतित पावनी गङ्गा जी ने अपनी धारा से अपने क्षेत्रो उपजाऊ बना दिया , जहाँ जहाँ से गङ्गा जी गुजरी वहां की सँस्कृति का इतिहास मे अपना नाम था, वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो गंगा क्षेत्र में रहने वाली करीब 35 करोड़ की आबादी अपने जीवन के लिए गंगा पर निर्भर रहती है. यही कारण है कि गंगा को सभी धर्मो में भारत की भाग्य रेखा भी कहा गया है. दूसरे शब्दों मे ''गङ्गा है तो हम है गङ्गा नही तो हमारा अस्तित्व भी नही,,
यदि गङ्गा व उनकी सहायक नदियों युही प्रदूषित होती रही तो निश्चित ही 35 करोड़ लोगों का अस्तित्व भी मिटा जायेगा, सभी शहरों का अस्तित्व गङ्गा जी के दम पर है सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता गङ्गा जी के कारण है गङ्गा जी नही तो तीर्थ नही, पर्यटन नही, व्यापार नही, क्या आपको नही लगता मित्रों ऐसी अनमोल दैव्य धरोहर को बचाना चाहिये कागजो मे नही,प्रयास हो सार्थक, सच्ची से, यदि मोदी जी की सेना के 300 संसद व छै छै विधायक अगर एक एक जिला को भी सम्भाले तो गङ्गा प्रदूषण की समस्या 2 वर्ष मे ठीक हो जायेगी, पर राज नेता कहा गङ्गा जी का दर्द समझते हैं वो तो वही समझेगा जो गङ्गा को ह्रदय से माँ मानता होगा गङ्गा जी को नदी मानने वाले कहा गङ्गा जी पीड़ा समझेगे,
गंगा के तट अमीरो के लिये पिकनिक स्पोर्ट है
खाओ पियो गंद मचाओ, मस्ती मौज मनाओ
गरीब भी कहा कम है तीर्थ के नाम पर
कपडे धोओ गङ्गा मे मैल मिलाओ
गंगा के तट मल-मूत्र का डेर लगाओ
जूठन,उतरन गंगा मे छोड़ पाप मिटाओ
हो गई गंगा मैली दोष गंगा पर लगाओ
है ग़र शर्म थोड़ी तो डूब चुल्लू मर् जाओ,.....
अब तो बस गंगा संरक्षण कानून बना चाहिये, इसके लिये कठोर कदम उठाने होंगे गंगा में गिरने वाले सभी गंदे नाले, मल-मूत्र और औद्योगिक प्रदूषण को तुरंत प्रभाव से रोका जाए. गंगा संरक्षण हेतु राष्ट्रीय गंगा आयोग गठित किया जाए. गंगा का शोषण किसी भी रूप में नहीं किया जाए.

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