Saturday, June 17, 2017

मेरी गङ्गा यात्रा-13

मेरी गङ्गा यात्रा-13

मित्रों पिछले भागो मे आपको गङ्गा जी के दर्द से अवगत करने की मैंने कोशिश की है पर गङ्गा जी का दर्द असहनीय है जो उनके अपने ही पूजने वाले समाज की देन है ऐसे मे गङ्गा किस
को कुछ नही करती, माँ जो ठहरी, गङ्गा जी का घाव अब नासूर होने की ओर बढ़ रहा है अभी प्रयास नही हुआ तो गङ्गा जी अमृत से मृत हो जायेगी बिना परिश्रम के मिली गङ्गा का मूल्य हम क्या जाने ,इतिहास मे कृपया पूर्व मे जाकर भगीरथ और उसके पूर्वजों से पुछो, क्या है गङ्गा का मोल..? गङ्गा जी की एक एक बूंद को तरसते मृत परिजनों से पूछो या अपने ही मृत पूर्वजो से पूछो क्या है गङ्गा , जिसके बिना न जीवित की गति है न मृत की सत गति है फिर भी न जाने कौन सी हींन भावना है जो सत्य से मुख मोड़ रहे हैं ऐसा भी क्या सैक्युलर होना जो नदियों ही निगल जाये, कैसे है धर्म के जानकार , गङ्गा के पूजने वाले जो मिटती गङ्गा को देख रहे हैं या गङ्गा पुत्र 
पूत कपूत हो पर माता कुमाता कभी न कहलावै.......
पिछले वर्ष सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को ऐसे संयंत्रों की संख्या, इनके लिए मंगाई गई निविदाओं और मौजूदा संयंत्रों की स्थिति पर रिपोर्ट देने के लिए भी कहा था इस बेंच में जस्टिस ठाकुर के अलावा जस्टिस आरके अग्रवाल और ए के गोयल भी शामिल थे मैंने अखबारों मे पढ़ा कि न्यायालय में पर्यावरणविद एम सी मेहता की ओर से गंगा की सफाई के बारे में डाली गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई हो रही हैं 
2500 किलोमीटर लंबी गंगा की सफाई के लिए नदी के तट पर बसे 118 नगरपालिकाओं की शनाख्त की जा रही है जो प्रदूषण के कारक है जहां वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सहित पूरी साफ सफाई का लक्ष्य हासिल किया जाये वही खबर यह थी कि मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में सौ से अधिक लाशें मिलने के बाद सामने आया है कि कुछ समुदायों के लोग मृतकों को जलाने के बदले लाशें नदी में बहा देते हैं. केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश की सरकार से गंगा नदी में मिली उन लाशों पर रिपोर्ट भी मांगी थी पर हुआ क्या .? सब गोलम गोल,कौन खोले पोल, चार पहर का शोर मात्र रहा फिर गहरी खामोशी , और गङ्गा अपने दर्द के साथ अकेली 
इस बीच एक बार फिर कोई जागा, आवाज उठी,गंगा के अलावा दूसरी नदियों को भी साफ रखने के लिए कदम उठाए जाने की बात हुई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी ने यमुना में पूजा और निर्माण सामग्री तथा अन्य कचरा डाले जाने पर 50 हजार रूपये तक का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है आपको लगता है यह उचित कदम है मेरी निगाह मैं कोरी मूर्खतापूर्ण पर्यास है.नदियाँ पूजा के कचरे से नही नालो और आधोगिक कचरे से प्रदूषित है , प्रदूषित है सरकार की अनदेखी से,..
जुर्माना सरकारों पर भी लगे जिन शहरों से नदियो मैं मल मूत्र, आधोगिक कचरा नदियों को प्रदूषित कर रहा है यदि सामान्य जन पर जुर्माना 50 हज़ार है तो सरकार पर 50 करोड़ हो वही पएनजीटी ने कड़े निर्देश देते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से औद्योगिक इकाईयों को नदी में कचरा बहाने की इजाजत नहीं देने को कहा था पर आज भी प्रदूषण बा-दस्तूर जारी है देश के बेडा गर्क की तैयारी है 
पिछले 10वर्षो मे गङ्गा बचाने के लिये आम भारतीय बहुत हद तक जाग्रत हो चूका लगता हैं कुछ जाग्रति आती लगती हैं पर लोग सामर्थ वान नही है पर जाग्रत है नही जागे तो हमारे चुने सांसद व् विधायक ये सामर्थवान है पर जागरूक नही.,,
1986-1992 के दौरान भारतीय विषाक्तता अनुसंधान केंद्र (ITRC), लखनऊ द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला कि ऋषिकेश, इलाहाबाद जिला और दक्षिणेश्वर में गंगा नदी के जल में पारे की वार्षिक सघनता क्रमशः 0.081, 0.043, तथा 0.012 और पीपीबी (ppb) थी।
मैं हरिहर वेला...
सोचा,जीवन ये कुछ काम में आवे..
माँ गंगा ने पुखे तारे..
हम काे गंगा बचाये
, हम गंगा काे बचाये
आओ संकल्प ले हम गंगा काे

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