Wednesday, September 30, 2020

मेरी गंगा यात्रा भाग 104

मेरी गंगा यात्रा भाग 104
इक प्रयास गंगा बचे
गंगा मे बढ़ते प्रदूषण से हम सभी अवगत हैं और यह कम होने का नाम नही ले रही, मानो पुनः रक्तबीज प्रदूषण बनकर आ गया हो,वही गङ्गा को लेकर एक नई परेशानी आ गई हैं आप जानते ही किसी भी नदी को प्रदूषण मुक्त करने मे उसमें रहने वाले जीवो का बहुत बड़ा हाथ होता हैं वह जीव नदियों मे बहने वाले कचरे,मृत जीव आदि को खाकर खुद भी जिंदा रहती हैं और साथ ही नदियों को भी साफ करते हैं मनुष्यों की तरह इनका भी एक अपना समाज, परिवेश होता हैं यह क्षेत्रीय जलवायु के अनुरूप जी जीते है इनका बदलता परिवेश इनके लिए घातक होता हैं उसके चलते, उतर प्रदेश की पावन नगरी वाराणसी में गंगा नदी से एक ऐसी मछली मिली है, जिसने वैज्ञानकों का सिरदर्द बढ़ा दिया है. गङ्गा नदी के मछुवारे  बताते है कि ये एक अमेरिकी प्रजाति की मछली है जो गंगा में मौजूद अन्य प्रजाति की मछलियों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है. बता दें कि अभी हाल ही में गंगा नदी से एक और ऐसी ही अजीबो-गरीब प्रजाति की मछली मिली थी.
वैज्ञानिकों ने बताया कि वाराणसी की गंगा नदी में पाई गई इस अमेरिकी मछली का नाम 'सकरमाउथ कैटफिश' है जो आमतौर पर दक्षिण अमेरिका के अमेजन नदी में पाई जाती है. लेकिन यहां सबसे बड़ी हैरानी की बात ये है कि आखिर ये मछली अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर वाराणसी तक कैसे पहुंच गई...?
अब हम आपको बताते है कि यह मछली गङ्गा जी मे कहा से आई, यह हजारो की किलोमीटर का सफर कर भारत पहुची हैं सच हैं,परन्तु यह स्वयं जलमार्गों से तैर कर नही अपितु हवाई, और समुंद्री पोत से भारत आई हैं आप हैरान हो गये जी हाँ यह सच है विश्व के सभी कोनो से भारत मे पालन हेतु हर प्रकार की, सुंदर, हिंसक, सॉफ्ट, हार्ड मछलियों को आयत किया जाता हैं यह ऐकुरयम मे पालन हेतु लाई जाती हैं जिनकी कीमत 2 डॉलर से 3000 डॉलर तक भी हो सकती हैं कलकत्ता, विशेष रूप से,यहाँ इनका पालन और प्रजनन मत्स्य केंद्रों मे किया जाता हैं फिर रेल मार्ग से इन्हें दिल्ली ओर भारत भर मे बेचा जाता है भारत भर के मछली पालन धनवान ऐकुरयम मे इन्हें पालते है जब इनका साइज 2 इंच से 6 इंच होता हैं यह सुंदर दिखती हैं वही जब से 1, से 2 फुट की हो जाती हैं ऐकुरयम मे जगह खाती हैं तो इन्हें यह लोग नदियाँ में छोड़ आते है आजकल कैट फ़िश की मांग अधिक है और यह इस तरह गंगा जी मे पहुंची होगी ,.वही बीएचयू के जन्तु विज्ञान संकाय के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे कहते कि ये मछली मांसाहारी है, जो नदी में मौजूद अन्य मछलियों को अपना शिकार बना सकती है. जिससे गंगा नदी का सिस्टम बिगड़ सकता है.जो सत्य है यह मछली गंगा मे रहने वाली मछलियों के लिये घातक हैं  गंगा नदी में नाव चला रहे नाविकों को कुछ दिन पहले ये अमेरिकी 'सकरमाउथ कैटफिश' नजर आई थी. जिसके बाद उन्होंने मछली को पकड़कर गंगा प्रहरी को सौंप दिया था. वैज्ञानिकों ने 'सकरमाउथ कैटफिश' को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि गंगा में इनकी संख्या बढ़ती है तो ये अन्य प्रजातियों की मछलियों को खा जाएंगी, जो नदी को साफ-सुथरा रखने में अहम भूमिका निभाती हैं. ऐसे में गंगा नदी पहले से ज्यादा गंदी हो सकती है. यह गंगा जी के प्रदूषण मुक्ति की राह मे बड़ा रोढ़ा हो सकता हैं

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