Sunday, September 27, 2020

मेरी गंगा यात्रा भाग 102

 मेरी गंगा यात्रा भाग 102

इक प्रयास गंगा बचे

पहले ही बताया कि सम्पूर्ण भारत मे कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन (बंद) के बाद से गंगा नदी की स्वच्छता में बड़ा सुधार देखा गया है कारण, एक ही, क्योंकि इसमें औद्योगिक इकाइयों का कचरा गिरने में कमी आई है. यानि गंगा प्रदूषण का मुख्य कारण प्रदूषण फैलाने वाले औद्योगिक घराने ही हैं,...जो विकास के नाम पर नदियों और प्रकृति का विनाश ही कर रहे है यह हम सभी विशेषज्ञ गंगापुत्र मानते है.पर कोई कुछ कर नही सकता,.. कारण हम सभी धृतराष्ट्र के दरबारी हैं और सत्ता अंधी,..भारत में कोरोना वायरस के कारण तीन हफ्तों का बंद था.लॉकडाउन की वजह से 24 मार्च से ही देश की आबादी घरों में ही सिमटी हुई थी.वही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, ज्यादातर निगरानी केद्रों में गंगा नदी के पानी को नहाने लायक पाया गया है. यानि अभी भी गंगा जल अभी मनुष्य के पीने की स्तिथि में नही, तब जब 99% आबादी घरों मे कैद हैं तो सोचो गंगा की क्या स्तिथि होगी, प्रदूषण ने गंगा को किस क़दर लील लिया है वही सीपीसीबी के वास्तविक समय के निगरानी आंकड़ों के अनुसार, गंगा नदी के विभिन्न बिंदुओं पर स्थित 36 निगरानी इकाइयों में करीब 27 बिंदुओं पर पानी की गुणवत्ता नहाने और वन्यजीव तथा मत्स्य पालन के लिए ही अनुकूल हैं सोचो कल क्या स्तिथि हो सकती हैं पुनः,
इससे पहले, उत्तराखंड और नदी के उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने के कुछ स्थानों को छोड़कर नदी का पानी बंगाल की खाड़ी में गिरने तक पूरे रास्ते नहाने के लिए अनुपयुक्त पाया गया था. विशेषज्ञों का कहना है कि खासतौर से औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास बंद लागू होने से गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता में कुछ सुधार हुआ था, औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा गया था. औद्योगिक शहर कानपुर में गंगा के आसपास काफी सुधार पाया गया जहां से बड़ी मात्रा में औद्योगिक कचरा निकलता है और इसे नदियों में फेंका जाता है.उन्होंने कहा, ‘गंगा की सहायक नदियों जैसे कि हिंडन और यमुना में भी पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया था.’हिंडन और यमुना का काला जल कुछ उत्तम था इस बंद की अवधि के आने वाले दिनों में गंगा के पानी की गुणवत्ता में और सुधार होने की संभावना लगी. मथुरा के आसपास भी सुधार देखा गया है.‘नदी में अब भी जैविक प्रदूषण है जो कभी पुनः अपने घातक स्तर को पार कर सकते है उद्योगों के रासायनिक प्रदूषण ने नदी के खुद से साफ करने वाले तत्वों को नष्ट कर दिया. खुद से साफ करने के तत्वों में सुधार के कारण पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है.’हालांकि, गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, यह सब निजी अनुभव और मीडिया के विश्लेषण के आधार हैं.(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ,)
Ganga Bachao Abhiyan Save-ganga and Suresh Mittal

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