मेरी गंगा यात्रा भाग 103
इक प्रयास गंगा बचे
कुछ समय पहले"सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड" की तरफ से गंगाजी के जल की जांच करवाई गई थी तो पता चला कि लॉकडाउन से पहले जहां गंगा का पानी स्नान योग्य भी नहीं था लेकिन अब पानी को नहाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है गौर रहे अभी पीने योग्य नही है
कोविड 19 की वजह से जो लॉकडाउन हुआ था उससे पूरी दुनिया में प्रकृति में स्वच्छता तो आ गई थी हालात की तस्वीरें इसकी गवाह भी बनी पर वही बिहार की स्तिथि ढाक के तीन पात थी, बिहार की राजधानी पटना में ऐसा होता नहीं दिख रहा था वहाँ स्थिति जस की तस, रही क्योंकि वहां गंगा के पानी की स्थिति पहले जैसी ही प्रदूषित रही, यह बड़ी चिंता का विषय रहा, वही कलकत्ता मे भी कुछ ख़ास परिवर्तन नही रहा, वही दूसरे राज्यों में गंगा जी का जल साफ दिख रहा था लेकिन पटना में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था हाल ही में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से गंगा के पानी की जांच करवाई गई तो पता चला कि लॉकडाउन से पहले गंगा का पानी स्नान योग्य भी नहीं था. हालांकि अब यह संभव हो गया है. लेकिन पानी अभी इतना साफ नहीं हुआ है कि इसे पीने में इस्तेमाल किया जा सके. बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी में शहर के 3 बडे नालों का गन्द पानी बहाया जाता है. राजापुर पुल नाला, मंदिरी नाला और अन्य नालों के जरिए शहर का गंदा पानी गंगा को दूषित करता था करता हैं और करता रहेगा जब तक सरकारे नही जागेंगी, केंद्र की नमामि गंगा योजना यहाँ कमजोर नज़र आती हैं सम्पूर्ण भारत मे नदियों का पानी काफी साफ हो चुका है पर कुछ समय के लिए ही, पुनः देख लेना, स्थिति बतर ही होने वाली हैं क्योंकि यह योजना प्रकृति बदलाव की थी मनुष्य की नही,नदियों का पानी अब वो पीने योग्य हो चुका है यह दावा पूरी तरह झूठा है. नालों का पानी गंगा नदी में जाना जब तक नहीं रोका जाता तब तक गंगा नदी का पानी साफ होना असंभव है.
अभी इसके लिये सख्त कानून की आवश्यकता है
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